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Gulzar Poetry ( गुलज़ार कविता )

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1.Gulzar Poetry  ( गुलज़ार कविता ) 1. आमीन ख्याल, सांस नज़र, सोच खोलकर दे दो लबों से बोल उतारो, जुबां से आवाज़ें हथेलियों से लकीरें उतारकर दे दो हाँ, दे दो अपनी 'खुदी' भी की 'खुद' नहीं हो तुम उतारों रूह से ये जिस्म का हसीं गहना उठो दुआ से तो 'आमीन' कहके रूह दे दो 2. मरियम रात में देखो झील का चेहरा किस कदर पाक, पुर्सुकुं, गमगीं कोई साया नहीं है पानी पर कोई सिलवट नहीं है आँखों में नीन्द आ जाये दर्द को जैसे जैसे मरियम उडाद बैठी हो जैसे चेहरा हटाके चेहरे का सिर्फ एहसास रख दिया हो वहाँ 3. आह! ठंडी साँसे ना पालो सीने में लम्बी सांसों में सांप रहते हैं ऐसे ही एक सांस ने इक बार डस लिया था हसी क्लियोपेत्रा को मेरे होटों पे अपने लब रखकर फूँक दो सारी साँसों को 'बीबा' मुझको आदत है ज़हर पीने की 4. मानी चौक से चलकर, मंडी से, बाज़ार से होकर लाल गली से गुज़री है कागज़ की कश्ती बारिश के लावारिस पानी पर बैठी बेचारी कश्ती शहर की आवारा गलियों से सहमी-सहमी पूछ रही हैं हर कश्ती का साहिल होता है तो- मेरा भी क्या साहिल होगा? एक मासूम-से बच्चे ने बेमानी को मानी देकर रद्दी के काग...